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बिहार चुनाव के मायने :लोग अंधे नहीं है...

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बिहार चुनाव एक झोका नहीं बल्कि तूफान बन कर आया और परिणाम ने बड़े बड़े दिग्गजों को हिला कर रख दिया . मेरी समझ में इस चुनाव के अर्थ निम्न है…

राजद + लोजपा — लोजपा तो खैर २००४ में ही बाहर हो गयी थी . जनता ने उसे किंग maker बना के भेजा पर वो एक मुस्लिम (??) को मुख्यमंत्री बनाए के नाम पर चाबी जेब में धरे रह गए . अरे भाई मुस्लिम से ऐतराज़ किसीको नहीं है पर तुम प्रोजेक्ट तो करो . जैसे नेहरु गाँधी परिवार का नवजात भी कांग्रेस का आला बन ने की योग्यता रखता है क्या वैसी योग्यता हर मुस्लिम में जन्मजात आ जाएगी की वो बिहार का कायाकल्प कर दे.
खैर ये तो पुराणी बात है. नई बात तो ये थी की उन्हों ने “हम क्या करेंगे” ये छोड़ कर सुशाशन की हवा निकलने की कोशिश की . अरे भाई दुनिया बिहारी को कितना भी गंवार का पर्यायवाची बनाने की कोशिश करे . लोग अंधे नहीं है.

कांग्रेस (युवराज)- ये आये तो गरीबो के घर का खाना खा के दिखाने लगे. की तुम जैसे हो वैसे ही ठीक हो हम लोग तुम्हे अछूत नहीं मानते. हम तुम से अलग नहीं है. पर गरीबी कैसे हटे इसका क्या उपाय है ये नहीं बताया. फिर वही बात “लोग अंधे नहीं है”.

सबसे हास्यास्पद दावा तो माया वती जी ने किया. उन्होंने कहा की हम बिहार को यूपी जैसा बना देंगे. जवाब आया ” माफ़ करना बहन जी , हमारे बिहार में रहने को जगह नहीं है मुर्तिया कहा लगोगे. श्पष्ट है ..”लोग अंधे नहीं है”..

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Raghvendra Kumar Jha के द्वारा
January 18, 2011

Very nice thought flow, try to write long article.

    deepak pandey के द्वारा
    January 18, 2011

    thanks , its just start.

Girish Chand Gupta के द्वारा
January 13, 2011

बिहार की राजनीति का जनादेस आज देश में नए युग के निर्माण की संभवना जगाई है .धरम अवम जाती की राजनीति करने वालो को एक जन सन्देश है. राज्यों को विकास का कार्य करने का उदहारण है. जब बिहार शुन्य से दहाई के अंको में पहुच सकता है , तो फिर अन्य राज्ये क्यों नहीं. राजनीति में नित्य नए परिस्थितिया अवम माहौल बनता जो युगों तक याद किया जाता है या फिर इतिहास बन जाता है. बिहार ने दिखाया है प्रबल इच्छाशक्ति अवम संकल्प शक्ति के अद्धर पर कुछ भी किया जा सकता है , सकारात्मक दिशा में.

Amit Dehati के द्वारा
January 6, 2011

बहुत ही सुन्दर लेख …………………. अच्छा टोपिक ……………., अच्छी रचना के लिए हार्दिक बधाई ! नववर्ष मंगलमय हो !

abodhbaalak के द्वारा
January 4, 2011

दीपक जी काश पूरे देश की जनता इसी तरह की धारणा रखती, जहाँ विकास के नाम पर वोट दिए जाते, न की जाती, धर्म, क्षेत्र आदि के नाम पर सराहनीय लेख पर बंधाई हो http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    deepak pandey के द्वारा
    January 4, 2011

    सुबोध जी दीप से दीप जले ये कहावत तो सुनी होगी आपने बस हमे जरूरत है इसकी . बिहार ने तो अलख जगा दी है आगे देखिये क्या होता है. प्रोत्साहन के लिए धन्य वाद .


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