अंधेरगर्दी

आम आदमी का दर्द ......

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लोकतंत्र या तानाशाही: खुद फैसला करें .....

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मैं एक आशावादी इन्सान हु साथ ही मेरा उद्देश्य दुसरो में खोट ढूढने के बजाये गुणों की खोज में ज्यादा रहता है . पर पता नहीं क्यों मेरे सब्र का बांध टूट सा गया है लगता है इस देश में तानाशाही आ चुकी है . निम्न बिन्दुओ पर विचार किजिये और बताइए की मैं सही हूँ या गलत.

गुरुवार की शाम मै बड़े शौक से tv के पास बैठा . मसला था मंत्री मंडल में फेर बदल का. सोचा देखू क्या परिवर्तन होता है . उससे पहले दिन देश के बड़े उद्योगपति जो आम तौर पर राजनितिक रूप से निष्क्रिय ही रहते है उनके प्रतिनिधिमंडल ने मिल कर सर्कार की शिकायत की थी उससे और भी उम्मीद जगी थी . सोचा था की कम से कम भ्रष्ट और नाकारा लोगो की छुट्टी होने की उम्मीद थी . कम से कम महंगाई मंत्री की छुट्टी तो निश्चित ही थी .पर सबसे नाकारा तो उनका नेता ही निकला / . परिणाम वही ढाक के तीन पात. बस उनके पद यदि प्रभु चावला के शब्दों में कहे तो तस के पत्तो की तरह इधर से उधर कर दी गए थे . और एक बयां आया की बड़ा फेरबदल बजट सत्र के बाद किया जायेगा . अमा यार ३४ लोगो के फेरबदल किये और कहते हो की ये छोटा है .उसपे भी सारे फेरबदल अनावश्यक है . जो एक जगह अच्छा काम नहीं कर पाया वह दुसरे जगह क्या कर पायेगा .
चलिए ये फेरबदल तो पार हो गया निरुद्देश्य . उसके बाद pm का रटा रटाया बयान महंगाई के विर्रुद्ध मैं कोई ज्योतिषी नहीं हु . मार्च तक महंगाई काम होने की उम्मीद है
अरे भैया एक तो कहते हो की मैं ज्योतिषी नहीं हु . फिर भी सड़क छाप ज्योतिषियों की तरह बयान पार बयान दिए जा रहे हो जो हर बार झूठी साबित होती है . अगर तुम ज्योतिषी नहीं हो तो किसी ज्योतिषी को मौका दो .और नहीं तो हमारे पियूष पन्त
जी तो तैयार ही है . उन्ही को मौका देदो .
बस मन खिन्न हो गया इस समाचार के बाद . फिर मैंने zee news में बहस की और ध्यान दिया . बहस में शामिल थे कांग्रेस के शकील अहमद साहब . जैसे ही पत्रकार ने कहा की शकील अहमद साहब , क्या जरुरत थी इस परिवर्तन की . बस शकील अहमद साहब पिल पड़े . आप नुट्रल है या सर्कार विरोधी . कितने बड़े लोगो पे घटिया इलज़ाम लगा रहे है इत्यादि इत्यादि . पत्रकार बोल रहा है ‘शकील साब …’ और वो अपनी रौ में चिल्लाये जा रहे है . तो क्या ये लोकतंत्र है . की चिल्लाये जाओ और सवाल को गौण कर दो . तो यहाँ पार कुछ भी काम लायक नहीं मिला .ibn 7 लगाया तो वह भी बहस हो रही थी शकील अहमद जी उसी तरह चिल्लाये जा रहे थे . पत्रकार ने सिर्फ रिटायर शब्द का प्रयोग किया बस पिल पड़े शकील साहब तुम्हारे घर में माँ बाप है उनको भी रिटायर कर के बदल दोगे इत्यादि इत्यादि. तो ये है कांग्रेस का लोकतंत्र की खुद कहो दुसरे की मत सुनो . कोई आवाज़ उठे तो उससे दस गुना शोर करो ताकि वो आवाज़ गुम हो जाये .मैं समझ गया की इस फेर बदल से क्या होने वाला है .

बात आई सुप्रीम कोर्ट के . सुप्रीम कोर्ट के भी हवस गुम हो गए जब उसे स्विस बैंक में भारत की जमा राशी की जानकारी मिली . उन्होंने कहा की मुझे नहीं पता की इससमे कितने जीरो हैं पर यह होश उड़ने वाला है . . वास्तव में होश उड़ने वाला है . पर नाम कोर्ट को बता सकते है तो सार्वजानिक करने में क्या है . आखिर उसमे नेहरु से लेकर गाँधी तक कितनो के नाम होंगे . असल परेशानी तो यही है.

अब बात आई तिरंगा यात्रा की . कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराना आन का विषय बन चूका है न सिर्फ bjp बल्कि हर भारतीय के लिए . आखिर क्यों न हो जिस झंडे के लिए इतने ने जान दी उसे फहराना में कैसी शर्म . फिर किसी को बुरा लगे तो क्या . साब कहते है की बीजेपी तिरंगे पर राजनीती कर कर रही है . तो क्या गलत है अगरआप हिन्दू मुस्लिम , अचुत दलित पर राजनीती कर सकते हो तो क्या बीजेपी आत्मसम्मान की राजनीती नहीं कर सकती . जिस तरह से उम्र अब्दुल्ला crpf की दीवार लगा रहे है उनके लिए वह तो लगता है जैसे कितना बड़ा राजद्रोह करने जा रहे है . और जो राजद्रोह कर रहे है उनके लिए आप क्या कर रहे है . कहते है की अगर स्थिति बिगड़ी तो हम जिम्मेदार नहीं होंगे . अरे स्थिति सुधरी कब है और अब तक के किस बिगाड़ की जिम्मेदार की है आपने .
कल जो घटना हुई उसने झकझोर कर रख दिया . महाराष्ट्र से बीजेपी यात्रियों के दल को सोते सोते में ही बैरंग लौटा दिया . क्या महाराष्ट्र में भी स्थिति बिगाड़ सकती है . मानते है की यह महाराष्ट्र है पर क्या यहाँ यात्रियों का जाना मन है यहाँ कौन से स्थिति बिगाड़ रही थी ..

बाते बहुत कुछ है पर आप ही जवाब दो की क्या ये लोकतंत्र है……….

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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajkamal के द्वारा
January 27, 2011

दीपक जी …नमस्कार ! मैं इस हक में नही हूँ की किसी भी बहाने से या फिर राजनीती के चलते देश ही नही बल्कि पूरे विश्व के सबसे सवेदनशील इलाके का माहौल बिगाड़ा जाए …. सभी जानते है की जब भी चौथा और अंतिम विश्वयुद्ध होगा तों वोह कश्मीर के मुद्दे को लेकर भारत पाक की लड़ाई से ही शुरू होगा …… इससे पहले जब अतीत में कांग्रेस ने फारुक अब्दुल्ला की बजाय जी. एम्. शाह. की सरकार बनवा दी थी तों पूरे दस साल तक यह शांत घाटी अशांत रही थी ….. इसलिए अब दुबारा से ऐसी कोई भी गलती नही होनी चाहिए …. अगर वहां का माहौल अशांत होता है तों हमको पूरे विश्व में हरेक मंच पर पाक के अर्नगर्ल आरोपों का सामना करना पड़ता है और बेवजह निचा दिखना पड़ता है …. बाकी आगे आप खुद समझदार है

    deepak pandey के द्वारा
    January 28, 2011

    आप अपने इसी सोचने के अलग अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं. परन्तु हमारे झारखण्ड में नक्कासली अगर कहते है की वोट का बहिष्कार करो वर्ना हम मार काट फैलायेंगे तो क्या हम डर कर घर बैठ जाये. अगर हम वोट न दे तो शांति रहेगी पर इस शांति की क्या कीमत है आप तो बखूबी जानते होंगे. मै ना बीजेपी की पैरवी नहीं कर रहा न ही मै मानता हु की बीजेपी कांग्रेस से बहुत बेहतर है पर इस शांति की क्या फायदा . वैसे मेरा लेख तिरंगा यात्रा का समर्थन में नहीं है. परन्तु जिस तरह से दमन किया उस को लेकर है. ८४ लाख लेकर ट्रेन बुक करवाई उसे वापस भेज दिया. रोकने के लिए ऐसे खड़े थे जैसे …………. वैसे बाकि मुद्दों को आपने अनछुआ छोड़ दिया . आप ही सही समीक्षा कर सकते थे. मै तो अपने बाल मन की व्यथा लिख रहा हु. आप का आशीर्वाद मुझे प्रेरित करता है. शुक्रिया.

nishamittal के द्वारा
January 26, 2011

आज राजनीति का घिनौना खेल देश को बर्बाद कर रहा है हम बैठे -बैठे तमाशा देख रहे हैं.

    deepak pandey के द्वारा
    January 27, 2011

    कल जो भी हुआ वह अंग्रजो के राज की याद दिला गया..

rahulpriyadarshi के द्वारा
January 25, 2011

राजमाता सोनिया के रहते भी अगर कोई लोकतंत्र की कल्पना भी करने की ताकत रखता है तो भैया मेरी सहानुभूति आपके साथ है,बाकि जैसी जनता की मर्जी.

    deepak pandey के द्वारा
    January 27, 2011

    कुछ जयचंदों की वजह से ही हमारा देश सदियों तक विदेशी ताकत का गुलाम रहा है. दुसरो को दोष देने के बजाये हम अपने दामन के दाग देखे तो बेहतर होगा..

raghvendra kumar के द्वारा
January 25, 2011

Very sensitive and sensible article, Weldon, The congress party is being run by a poisonous female foreign snake…All congress people are coward…dam sonia kwatrochi

rajeev dubey के द्वारा
January 24, 2011

जवानों लड़ने की तैयारी रखना, नहीं तो ये लोग देश फिर से बाँट देंगे…

    deepak pandey के द्वारा
    January 25, 2011

    सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है , देखना है जोर कितना बाजु ए कातिल में है .

Deepak Sahu के द्वारा
January 24, 2011

दीपक जी! पता नहीं कॉंग्रेस सरकार को कश्मीर मे तिरंगा लगाने से आपत्ति क्यों है! क्या उसने कश्मीर को पाकिस्तान को दे दिया है या वो इस पक्ष मे है की कश्मीर पाकिस्तान को मिले!!देश के दुश्मन तो यही है!वैसे भाजपा कुछ गलत नहीं कर रही है! कश्मीर देश का हिस्सा है तो वहाँ तिरंगा लगना ही चाहिए! दीपक

    deepak pandey के द्वारा
    January 24, 2011

    आपने तो देखा ही होगा कैसे कश्मीर में तिरंगा जलाया जा रहा है और पाकिस्तान के झंडे फहराए जा रहे है. देश रोएगा इस काली सर्कार के लिए.


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