अंधेरगर्दी

आम आदमी का दर्द ......

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बस यही बाकि था ....(kids belt)

Posted On: 27 Jan, 2011 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Alka Gupta के द्वारा
January 28, 2011

दीपक जी , ये चित्र अपने आप में बहुत कुछ बता रहे हैं …..इन मासूम बच्चों के प्रति कैसा व्यवहार….और ये माँए बस…….!

    deepak pandey के द्वारा
    January 31, 2011

    अलका जी जल्द ही यह परंपरा भारत( sorry india) में भी आने वाली है . प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद.

seema के द्वारा
January 28, 2011

apni aaram ke liye bachcho ke sath aisa behave chhi,,,,,,,,,,,,,, danyabaad

    deepak pandey के द्वारा
    January 28, 2011

    seema जी प्रितिक्रिया के लिए धन्यवाद .

January 28, 2011

क्या चीज पेश की है दीपक भाई…..बहुत अच्छे.

    deepak pandey के द्वारा
    January 28, 2011

    शुक्रिया राजेंद्र भाई , आगे आगे देखिये क्या होता है.

    deepak pandey के द्वारा
    January 28, 2011

    और रतुरी जी से भरद्वाज जी कैसे बन गए..

    rajendra के द्वारा
    January 28, 2011

    भारद्वाज मेरा गोत्र है.

Deepak Sahu के द्वारा
January 28, 2011

दीपक जी! तसवीरों के माध्यम से बहुत कुछ कह दिया! बधाई1 कुछ बोल रही है ये तस्वीरें!

    deepak pandey के द्वारा
    January 28, 2011

    दीपक जी आपको अच्छा लगा . धन्यवाद.

vinitashukla के द्वारा
January 28, 2011

अपनी सुविधा के लिए बच्चों को इस तरह बांधकर रखना वाकई निंदनीय है.

    deepak pandey के द्वारा
    January 28, 2011

    विनीता जी धन्यवाद . वैसे मैंने तो सुना है की कामकाजी महिलाये अब अपनी कोख भी सरोगेट मदर्स को दे रही हैं ताकि वो अपने काम से दूर न हो सकें . ऐसी माएं अपने बच्चों का ऐसे ही तो ख्याल रखेंगी . यह भारत के महानगरो में हो रहा है.

nishamittal के द्वारा
January 28, 2011

आपकी बोलती तस्वीरें बहुत कुछ कह रही हैं,दीपक भाई.

    deepak pandey के द्वारा
    January 28, 2011

    निशा दीदी आपको पसंद आयी उसके लिए धन्यवाद . पता नहीं और कितना तक गिरे जायेंगे लोग ..

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
January 27, 2011

भाई दीपक जी……… तसवीरों के माध्यम से आपने बहुत कुछ कह दिया…….. बहुत बढ़िया…….

    deepak pandey के द्वारा
    January 28, 2011

    तस्वीरे चुपचाप ही हर कुछ समझा जाती हैं. आपने नजर डाली उसके लिए धन्यवाद.

rajkamal के द्वारा
January 27, 2011

कहते है की आँखे करती है बाते दिल की जुबां नही होती ….. जहाँ तस्वीरे करती हो बाते वहां कलम काम की नही होती ….

    deepak pandey के द्वारा
    January 28, 2011

    शुक्रिया… इस शेर के लिए…


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