अंधेरगर्दी

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हर ख्वाहिश तेरे बगैर : "valentine contest"

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रह गई दिल में अधूरी ,हर ख्वाहिश तेरे बगैर ,

कैसे खुश रह कर गुज़ारूँ ,ज़िन्दगी तेरे बगैर ?

या खुदा को इल्म है या मै समझता हूँ इसे ,

जो कमी महसूस होती है मुझे तेरे बगैर !

कैसे काटेंगे वो तनहा अपनी सारी ज़िन्दगी ?

एक पल जिसने न काटा हो कभी तेरे बगैर !

क्या बताऊँ किस कदर फीके नज़र आने लगे ,

चाँद तारो में नहीं वो रौशनी तेरे बगैर !

तेरी यादो के तेरे रंगी ख्यालो के लिए ,

नाम को जिंदा है तनहा आज भी तेरे बगैर !



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17 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ramesh bajpai के द्वारा
February 28, 2011

या खुदा को इल्म है या मै समझता हूँ इसे , जो कमी महसूस होती है मुझे तेरे बगैर ! प्रिय दीपक जी इतनी गहराई से बही यह धार बहुत बहुत बधाई

    Ramesh bajpai के द्वारा
    February 28, 2011

    प्रिय दीपक जी यद्यपि उम्र का जिदगी की तल्खियो से लेना देना नहीं होता पर यु ही आपकी उम्र जानने की जिज्ञासा हो गयी अगर उचित समझे तो बताये |

    deepak pandey के द्वारा
    February 28, 2011

    रमेश बाजपाई जी, आप लोगो की तुलना में मै एक बच्चा हूँ. मेरी उम्र २६ साल है . रही बात गहराई की तो मै बस इतना ही कह सकूँगा की मैंने अपनी जिन्दगी में बहुत अनुभव पाए हैं कुछ मीठे तल्ख़ अनुभव. आज के दौर में मै ज्यादा से ज्यादा हास्य व्यग्य पर केन्द्रित हूँ.

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 11, 2011

बहुत खूब दीपक जी, एक नए रंग और तेवर में दिख रहे हैं आप|

    deepak pandey के द्वारा
    February 12, 2011

    वाहिद जी, हम तो बस आपके बीच रहना चाहते हैं इसी लिए कुछ न कुछ लिखते रहना पड़ता है. आप सबों का साथ मुझे खूब भाता है. धन्यवाद..

Amit Dehati के द्वारा
February 11, 2011

आदरणीय Pandey जी बहुत सुन्दर रचना ……एक दम दिल को छू गई …आपको ढेर सारी शुभकामनये ! http://amitdehati.jagranjunction.com/2011/02/09/%E0%A4%87%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%B8-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%86-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE/

    deepak pandey के द्वारा
    February 11, 2011

    अमित जी , कविता आपके दिल को छु आई , मेरी रचना सफल रही. आपको भी बहुत बहुत शुभकामनाये.

rajkamal के द्वारा
February 10, 2011

कैसे ‘काटेंगा’ वो तनहा अपनी सारी ज़िन्दगी ? चाँद तारो में ‘अब’ नहीं वो रौशनी तेरे बगैर ! प्रिय दीपक जी ….नमस्कार इस नए रूप और अंदाज़ में देख कर मन को बहुत ही अच्छा लगा …. बधाईयाँ व शुभकामनाये (झा जी का असर हो गया है कया जो फोटो )

    deepak pandey के द्वारा
    February 11, 2011

    बस इस शागिर्द को आपकी दुआ चाहिए. रतौरी जी, का असर पड़ा है थोडा.आपका धन्यवाद.

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 10, 2011

बढ़िया रचना……. दीपक भाई……. हार्दिक बधाई……

    deepak pandey के द्वारा
    February 11, 2011

    पियूष जी , बस आपकी दुआ है. धन्यवाद..

roshni के द्वारा
February 10, 2011

दीपक जी कैसे काटेंगे वो तनहा अपनी सारी ज़िन्दगी ? एक पल जिसने न काटा हो कभी तेरे बगैर बढ़िया ग़ज़ल

    deepak pandey के द्वारा
    February 11, 2011

    रौशनी जी ,आपने पसंद की , मेरी रचना सफल रही. धन्यवाद.

NIKHIL PANDEY के द्वारा
February 10, 2011

दीपक जी अच्छा लिखते है लिखते रहिये .. कांटेस्ट के लिए शुभकामना.

    deepak pandey के द्वारा
    February 11, 2011

    निखिल जी, मै तो बस लिखता हूँ, अच्छा आपलोग बना देते है. आपको भी शुभकामनाये. धन्यवाद.

rahul kumar (Bijupara,Ranchi) के द्वारा
February 10, 2011

फुलटू…….फटाक……………

    deepak pandey के द्वारा
    February 11, 2011

    मतलब बढ़िया है. धन्यवाद राहुल जी.


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