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इंतज़ार की प्यास है"valentine contest"

Posted On: 11 Feb, 2011 Others में

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मेरी बहुत पुरानी तुकबंदी पेश है, मुलाहिजा फरमाएं…………

कहीं चाँद राहों में खो गया ,
कहीं चांदनी भी भटक गयी .

में चिराग हूँ वो भी बुझा हुआ ,
मेरी रात कैसे चमक गयी.

मेरी दास्तान का वजूद था ,
तेरी नर्म पलको की छांव में .


कभी हम मिले तो भी क्या मिला ,
वोही दूरियां …. … वोही फासले.

ना कभी हमारे क़दम बढे ,
ना तुम्हारी झिझक गयी.

तुझे भूल जाने की कोशिशें,
कभी कामयाब ना हो सकी .

तेरी याद शक -ए -गुलाब है ,
जो हवा चली तो लचक गयी .

तेरे हाथ से मेरे होंठों तक ,
वोही इंतज़ार की प्यास है ……… .



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20 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ramesh bajpai के द्वारा
February 24, 2011

में चिराग हूँ वो भी बुझा हुआ , मेरी रात कैसे चमक गयी. क्या बात है सच इंतजार की ही प्यास है | बहुत खूब

    deepak pandey के द्वारा
    February 25, 2011

    मेरा ख्याल है की प्यास के बिना जिन्दगी बेमतलब होती है. चाहे वो कैसे भी हो.

Deepak Sahu के द्वारा
February 14, 2011

deepak ji! सुंदर पंक्तियाँ प्रस्तुत की आपने ! बधाई!

    deepak pandey के द्वारा
    February 14, 2011

    दीपक साहू जी, धन्यवाद .

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
February 14, 2011

प्रिय श्री दीपक जी, आपके इस ब्‍लॉग पर आया तो मन में था कि ताजा पोस्‍ट पढूँगा और टिप्‍पणी दे दूँगा। लेकिन पढ़ते-पढ़ते 11 पोस्‍ट पढ़ गया:- ■इंतज़ार की प्यास है ■हर ख्वाहिश तेरे बगैर : \"valentine कांटेस्ट\" ■परीक्षा में फ़ैल होने के तरीके: जबरदस्त ■लडकियों के जवाब जब आप प्रेम निवेदन करे. valentine contest ■जुगाड़ : समस्या का तत्काल समाधान ….part 1 ■गब्बर सिंह का ऑरकुट प्रोफाइल : very interesting ■ये कैसा चाहतों का सिलसिला है ……..valentine contest ■तनख्वाह का दिन : जानू.. ■मैं और मेरे मोबाइल..(खीज) ■बस यही बाकि था ….(kids belt) वेलेंटाइन कांटेस्‍ट के लिए लिखी गई कविताएं बहुत सुंदर हैं। आप इस कविता को भी कांटेस्‍ट का हिस्‍सा बना सकते थे। खैर अभी भी मौका है। हास्‍य का पिटारा है आपका ब्‍लॉग जो बोलते चित्रों से काफी कुछ कह जाता है। सभी पोस्‍टे एक से बढ़कर एक हैं। बहुत अच्‍छे। अरविन्‍द पारीक

    deepak pandey के द्वारा
    February 14, 2011

    अरविन्द पारीख जी, सराहना के लिए धन्यवाद. मुझे बहुत ख़ुशी हुई की आपने इतनी तन्मयता के साथ मेरे ब्लोग्स पढ़े . वैसे मेरा मूल मकसद हँसना और हँसाना ही है . वैसे आपकी सलाह मई मान लेता हु. आशा है आप इसी तरह स्नेह बनाये रखेंगे. वैसे अभी और भी कई रंग आने बाकि हैं हमारे ब्लॉग में .

omprakash pareek के द्वारा
February 12, 2011

दीपकजी , प्यार में इंतजार की कशिश लिए हुए एक ऐसी काव्य धारा बहाई आपने कि उस के रस में नहा कर आनंद विभोर हो गए हम तो . आपकी कविता पढ़ कर अपने ज़माने कि एक फिल्म का बकौल “साहिर लुधियानवी” की ये पंक्तियाँ जेहन में उभर उठी :- ” तुम्हे अपना कहने की छह में कभी हो सके न किसी के हम यही दर्द मेरे जिगर में है मुझे मार डालेगा बस ये गम” oppareek43

    deepak pandey के द्वारा
    February 12, 2011

    पारीख साहब , आपको आनद आया बस हमारा प्रयास सफल रहा. आपकी प्रस्तुत पंक्तिया मेरे अगली कविता के लिए प्रेरक है. आशीर्वाद बनाये रखियेगा.

HIMANSHU BHATT के द्वारा
February 12, 2011

दीपक जी…. बहुत सुंदर तुकबन्दियाँ हैं….. आभार………. http://himanshudsp.jagranjunction.com/

    deepak pandey के द्वारा
    February 12, 2011

    हिमांशु जी, धन्यवाद.

rajkamal के द्वारा
February 11, 2011

प्रिय दीपक जी …नमस्कार ! किसके हाथ है , और किसके लब है …… मगर प्यास का इंतज़ार तो किसी भी नज़रिए से उचित नही फिर चाहे वोह एक तरफ़ा हो या फिर दोनों तरफ से …… मेरा मतलब है की तू नहीं तो और सही ….. सुब्दर जुगलबंदी

    deepak pandey के द्वारा
    February 12, 2011

    गुरु जी, आप उल्टा पढ़ रहे हैं, यहाँ प्यास का इंतजार नहीं, इंतजार की प्यास है. किसके हाथ हैं और किसके लब इस राज़ को राज़ ही रहने दो. इस इंतजार में जो मज़ा है वो और कहाँ. और प्यास चाहे किसी भी चीज़ की हो इसके बिना जिंदगी बेमतलब होती है. तू नहीं और सही जिस्म तो समझ सकता है पर रूह का क्या करें.. धन्यवाद आपका..

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 11, 2011

दीपक जी…….. खूबसूरत तुकबंदी……. इसे तुकबंदी कहना गलत ही होगा……… अच्छी रचना के लिए बधाई……

    deepak pandey के द्वारा
    February 12, 2011

    पियूष जी, जर्रानवाजी के लिए शुक्रिया..:)

आर.एन. शाही के द्वारा
February 11, 2011

पांडेय जी, तुकबंदियां तो तुक्कों से बनती हैं, आपने तो अपनी लाइनों से अच्छे खासे तीर चलाए हैं । बधाई ।

    deepak pandey के द्वारा
    February 11, 2011

    आदरणीय शाही जी, सादर प्रणाम , सबसे पहले मै आपकी बधाई कबुल करता हूँ. आप की दृष्टि और टिप्पणी पाकर धन्य हुआ. स्नेह बनाये रखियेगा.

vinitashukla के द्वारा
February 11, 2011

अभिव्यक्ति की अच्छी कोशिश. प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं.

    deepak pandey के द्वारा
    February 11, 2011

    विनीता जी, उम्मीद करता हूँ आप लोगो के साथ और भी निखर आयेगा . पढने के लिए धन्यवाद.

nishamittal के द्वारा
February 11, 2011

लगता है दीपक जागरण पर एक से बढ़कर एक कवी हैं .सुंदर रचना ,शुभकामनाएं.

    deepak pandey के द्वारा
    February 11, 2011

    धन्यवाद, बहुत जल्दी पढ़ ली आपने. मुझे हार्दिक प्रसन्नता हुई.


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