अंधेरगर्दी

आम आदमी का दर्द ......

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सोचता हूँ मैं.."valentine contest "

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प्रस्तुत पंक्तिया मुझे एक दोस्त ने भेजी थी . मुझे पसंद आने के बाद मैंने उसमे कुछ और जोड़ कर आपके सामने पेश कर रहा हूँ…
सोचता   हूँ   के उसे नींद भी आती होगी ,

या मेरी तरह फ़क़त अश्क बहाती होगी ?

वो मेरी शक्ल मेरा नाम भुलाने वाली ,

अपनी तस्वीर से क्या आँख मिलाती होगी?

इस ज़मीन पर भी है सैलाब मेरे अश्कों से,

मेरे मातम की सदा अर्श हिलाती होगी ?

शाम होते ही वो चोखट पे जला के शमां,

अपनी पलकों पे कई खाब सुलाती होगी ?

उस ने सिलवा भी लिए होंगे स्याह लिबास,

अब राम जाने किस तरह दीवाली मानती होगी?

होती होगी मेरे बोसे की तलब मे पागल ,

जब भी जुल्फों मे कोई फूल सजाती होगी ?

मेरे तारीक़ ज़मानों से निकालने वाली ,

रौशनी तुझ को मेरी याद दिलाती होगी?

दिल की मासूम रगें खुद ही सुलगाती होंगी ,

ज्योंही तस्वीर का कोना वो जलाती होगी ?

रूप दे कर मुझे उस में किसी शाहज़ादे का,

अपने बच्चों को कहानी वो सुनाती होगी?



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17 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Bineet Shukla के द्वारा
March 2, 2011

Bahut badhiya…..

Ramesh bajpai के द्वारा
February 24, 2011

वो मेरी शक्ल मेरा नाम भुलाने वाली , अपनी तस्वीर से क्या आँख मिलाती होगी? प्रिय दीपक जी बहुत खूब ,इतने गहरे भाव | शुभ कामनाये |

    deepak pandey के द्वारा
    February 25, 2011

    बाजपाई जी, आपको पसंद आई उसका शुक्रिया.

    deepak pandey के द्वारा
    February 25, 2011

    मुनीश जी , धन्यवाद.

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 16, 2011

वो मेरी शक्ल मेरा नाम भुलाने वाली , अपनी तस्वीर से क्या आँख मिलाती होगी……….. रूप दे कर मुझे उस में किसी शाहज़ादे का, अपने बच्चों को कहानी वो सुनाती होगी…….. बहुत बढ़िया……… दीपक भाई॥

    deepak pandey के द्वारा
    February 16, 2011

    पियूष जी, बहुत बहुत धन्यवाद..

HIMANSHU BHATT के द्वारा
February 16, 2011

दीपक जी अच्छा जोड़ तोड़ कर लेते हैं आप….. शुभकामनायें…

rajkamal के द्वारा
February 14, 2011

होती होगी मेरे बोसे की तलब मे पागल , जब भी जुल्फों मे कोई फूल सजाती होगी ? भाई साहब क्यों उसके पीछे पड़े है बेचारी को अपने शोहर और बच्चो में मस्त रहने दो ….. अब आप भी किसी और से अपना दिल लगाइए

    deepak pandey के द्वारा
    February 15, 2011

    भाई साहब आने तो मेरा दिल फिर से तोड़ दिया. अब और किसी से क्या दिल लगाना, जब दिल ही टूट गया.

Deepak Sahu के द्वारा
February 14, 2011

सुंदर रचना! दीपक जी! कॉन्टेस्ट के लिए शुभकामनायें

    deepak pandey के द्वारा
    February 15, 2011

    दीपक साहू जी, बहुत बहुत धन्यवाद.

NIKHIL PANDEY के द्वारा
February 14, 2011

इस ज़मीन पर भी है सैलाब मेरे अश्कों से, मेरे मातम की सदा अर्श हिलाती होगी ? बहुत खूब दीपक जी इस उम्र में ये पंक्तिया.. भाई वाह आपके अन्दर एक बड़ा रचनाकार है.. लिखते रहे

    deepak pandey के द्वारा
    February 14, 2011

    धन्यवाद निखिल जी, बस आप स्नेह और प्यार बनाये रखें..


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