अंधेरगर्दी

आम आदमी का दर्द ......

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मज़बूरी का नाम महात्मा गाँधी नहीं??????

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आज मै bhadas4media पढ़ रहा था तो एक दिलचस्प लेख मिला जिसे मै ज्यो का त्यों पेश कर रहा हूँ.
अपने मनमोहन सिंह ने जिस ऐतिहासिक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया, अपनी मजबूरी का रोना रोने के लिए, वह प्रेस कांफ्रेंस ही मनमोहन के गले की फांस बनने लगी है. उस पीसी के जरिए मनमोहन ने खुद को सबसे मजबूर आदमी के रूप में पेश कर दिया है. मनमोहन की उसी पेशकश पर कुछ चुटकुले तैयार होकर आजकल यहां वहां विचरण कर रहे हैं. अपने बेचारे पीएम मनमोहन को लेकर बने दो नए चुटकुले या कमेंट्स, जो कह लीजिए आपके सामने पेश हैं. इसे पढ़कर आप जरूर कहेंगे कि ये आज के दिन के दो सबसे मजेदार वाक्य हैं. जो लोग इसे पहले पढ़ चुके हैं, उनसे अनुरोध है कि वे भी इस चुटकुले को जहां-तहां फारवर्ड करें… ताकि बेचारे पीएम की मजबूरी वाली बात और उनका मजबूर दर्शन हर जगह पहुंच सके. जय हो.

1.) कम से कम महात्मा गांधी को छुट्टी तो मिली, अब “मजबूरी का नाम मनमोहन सिंह” हो गया है…

2.) ”दबंग” फ़िल्म का सीक्वल बनेगा, इसमें हीरो होंगे मनमोहन सिंह… और फ़िल्म का नाम रहेगा- “अपंग”…



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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

omprakash pareek के द्वारा
February 25, 2011

दीपकजी, जरा ध्यान दें की आदरणीय पी.एम्. ने स्पेक्ट्रुम के १,७६००० करोड़ नुक्सान की तुलना सर्कार की गरीबी उन्मूलन की योजनाओं पर लगने वाली राशि से किया; यह कहते हुए की जब आप इस (स्पेक्टुम ) वाले पैसों को नुक्सान मानते हैं तो सामाजिक उत्थान वाली योजनाओं पर होने वाले नुक्सान को भी उसी प्रकार मानिये याने “जीरो” आमदनी वाला. उनकी यह बात कितनी दुर्भाग्यपूर्ण है, इसका अंदाज़ा आप लगा सकते हैं बल्कि मैं तो इस वक्तव्य को देश की जनता का सीधा सीधा अपमान मानता हूँ. इस विषय में आपके विचार जानना चाहूँगा.

    deepak pandey के द्वारा
    February 25, 2011

    जी हाँ पारिख साहब , जब मैंने यह पढ़ा तो मैं भी हतप्रभ रह गया था. कुल मिला कर pm ने बिलकुल वही काम किया है जो सोनिया जी या हमारे कृष्णा जी करते हैं यानी किसी वकील से थोथी दलीले लिखवा कर ले आये हैं. आखिर कितना गिरेंगे ये लोग .

omprakash pareek के द्वारा
February 25, 2011

दीपकजी, कार्टून हों या चुटकुले (जोक्स) इनका व्यंग्य अत्यंत चुटीला और असरदार होता है मैं मानता हूँ की हिंदी साहित्य में अभी भी अछे व्यंग्यकारों की कमी है. सिर्फ चंद लोग हुए हैं उनमें भी खालिस राजनितिक व्यंग्य लिखने वाले थोड़े ही हैं बहरहाल परसाईजी, श्रीलाल शुक्ल, ज्ञान चतुर्वेदी, प्रदीप पन्त, के. पी. सक्सेना, शरद जोशी, रविन्द्र कालिया अदि व्यंग्यकारों ने जो कुछ इस दिसा में योगदान दिया है वो किसी भी भाषा के लिए गर्व की बात है जाहिर है आप जैसे उदीयमान लेखकों से हिंदी को बहुत आशाएं है. उदहारण के तौर पर जागरण जंक्सन में एक ब्लाग ” भाईजी कहिन” होता है जो वास्तव में काफी अछे स्तर का व्यंग्य लेखन है.

    deepak pandey के द्वारा
    February 25, 2011

    आदरणीय पारीख साहब , उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया. वास्तव में व्यंग्य का ऊपरवाले की लाठी की तरह होता है जो हंसाये भी और गहरा सन्देश एवं प्रभाव छोड़े. ये सभी नाम तो मील के पत्थर हैं. जहा तक बात इस मंच की है यहाँ भी हमें स्तरीय व्यंग यदा कदा मिल जाते हैं. रही बात हम जैसो की तो हम बस यहाँ से ही सीखते हैं . बाकि प्रयास जारी है. पुनश्च , सार्थक टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

vinitashukla के द्वारा
February 24, 2011

बहुत अच्छी फब्तियां कसी हैं आपने प्रधानमंत्री की तथाकथित ‘मजबूरी’ पर. सही और खरी बात.

    deepak pandey के द्वारा
    February 24, 2011

    सराहने के लिए धन्यवाद.

    omprakash pareek के द्वारा
    February 25, 2011

    विनीताजी, इसी मज़बूरी पर मेरा ब्लाग भी पढियेगा. oppareek43

rktelangba के द्वारा
February 22, 2011
    deepak pandey के द्वारा
    February 23, 2011

    rktelangba जी, क्यों हम एक मजबूर की मज़बूरी का मजाक उड़ने दे, चलिए हम उनकी मज़बूरी से आजाद करने में सहयोग करें.

rajkamal के द्वारा
February 22, 2011

प्रिय दीपक जी …नमस्कार ! आप कहाँ -२ से ढूंड कर लाते है यह सब …. आज आपने नयी चीजे पेश की है ….. फिर भी मैं तो यहीं कहूँगा की कोई तो उनकी मजबूरियों को समझे

    deepak pandey के द्वारा
    February 23, 2011

    राजकमल जी शुक्रिया की आपको पसंद आई. वैसे अगर आपने उनकी press conference सुनी हो तो मैं कुछ बाते कहूँगा. १> उन्होंने व्यापारिओं का उदाहरण देकर कहा की दस में से सात निर्णय अच्छा ratio माना जाता है और यह मेरे साथ भी लागु है . जरा एक बात बताये की व्यापारी तो जवाबदेह होता है मुख्यत खुद के प्रति और पैसे भी उसके होते है . ये पैसा आपका नहीं सवा करोड़ जनता का है उसमे हर कदम सोच कर उठाना होगा. और हाँ १०/७ का मतलब ये नहीं की ३ को आप खुलेआम लुटने की इज़ाज़त दे दो..

    omprakash pareek के द्वारा
    February 25, 2011

    राज्कमल्जी, यह मज्बुरिनामा आप चाहें तो थोडा विस्तार में मेर ब्लाग में पढ़ सकते हैं.


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