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कृष्ण चरित्रहीन तो आप क्या हैं ????

Posted On: 2 Mar, 2011 में

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कल रात मैंने यहाँ मनोज गौतम जी का एक लेख पढ़ा “सनातन धर्म पर प्रहार” . तो मुझे भी अपने ईमेल पर आये एक लेख को बाँटने की जिज्ञासा हुई. मनोज जी ने लिखा है लोग बिना सोचे समझे कृष पर १६००० शादिया करने पर ऊँगली उठाते है. ऐसा ही एक दिलचस्प मामला कनाडा की एक अदालत में आया.

हुआ यो की ISKON के बढ़ते प्रभाव से जल भुन कर एक नन ने वहा की अदालत में एक मुकदमा दर्ज कराया . आरोप था की ISKON एक ऐसे धर्म का प्रचार कर रहा जिसका भगवन एक चरित्रहीन है, जिसने १६००० शादिया की थी. ISKON ने मुकदमा सलटाने की कोशिश की पर वो तैयार नहीं हुए.

मुकदमा शुरू हुआ. बचाव पक्ष के वकील ने वादी को बुलाया . उसने वादी नन से कहा की नन बनते समय जो शपथ ली थी उसे अदालत में दुहराये . उसने आनाकानी की तब वकील ने उसे खुद पढ़ कर सुनाया . उसका सर यह था के ये नन अपना जीवन इश्वर को समर्पित करते हैं और इशु से ही विवाह करते हैं. अब वकील ने अदालत से दरखास्त की अगर कृष्ण चरित्रहीन हैं तो इशु क्या है और इन लाखो करोडो ननों का क्या है . बस अदालत ने मुक़दमे को खारिज कर दिया .

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23 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
March 16, 2011

चलो भाई बात कायदे सिर निपट गई, शुकर मनाओ की ये वाकया कनाडा का था, भारत का मामला होता तो न जाने कितनी बैठकें होती कितनी अदालतों के चक्कर लगते और नतीजा ढाक के तीन पात वाला ही होता, कृष्ण को चरित्रहीन कह देते तो फिर भी ठीक था लेकिन अगर इशु को चरित्रहीन बोलते तो, ना जाने क्या क्या होता और ना जाने कितने लोग इस लफद्दर में अपने हाथ और रोटियां सेंक लेते …… वैसे जानकारी देने के लिए आपका शुक्रिया…

nishamittal के द्वारा
March 6, 2011

बिन जाने किसी भी धर्म पर आक्षेप निंदनीय है.आपके द्वारा दी जानकारी के लिए धन्यवाद.

    दीपक पाण्डेय के द्वारा
    March 6, 2011

    यह बात सभी को समझने की जरुरत है. हिन्दू धर्म का बहुत गहन इतिहास है. यहाँ तक की भारत में भी इसकी वेवजह विरोध करने वाले कम नहीं.

    दीपक पाण्डेय के द्वारा
    March 6, 2011

    आपकी प्रतिक्रिया का dhanyvad

Ramesh bajpai के द्वारा
March 4, 2011

प्रिय पाण्डेय जी बहुत दुख होता है जब पाश्चात्य के अंध भक्त भारतीय खुद इस तरह का अनर्गल प्रलाप करते है | अच्छी पोस्ट पर बधाई |

    दीपक पाण्डेय के द्वारा
    March 4, 2011

    आदरणीय रमेश बाजपाई जी, समर्थन देने के लिए आपका कोटिश धन्यवाद. जो लोग इस तरह का प्रलाप करते हैं उन्हें अभी और भी पढने की जरुरत है . किसी पर टिपण्णी करने से पहले उसका इतिहास और अपनी कमियों को अच्छी तरह से देख लेने की जरुरत है.

allrounder के द्वारा
March 3, 2011

बहुत ही अकाट्य तर्क दिया वकील साहब ने और ये वाकया पेश करने के लिए बधाई !

    दीपक पाण्डेय के द्वारा
    March 3, 2011

    सचिन जी, धन्यवाद आपका समर्थन के लिए..

rajkamal के द्वारा
March 2, 2011

प्रिय दीपक जी ….नमस्कार ! आजकल का जमाना ही कुछ ऐसा हो गया है कि दूसरे से उसी कि ही भाषा में जवाब देना पड़ता है …. लोहे को लोहा ही काटता है , ऐसे ही तो नही कहा गया है …… माननीय न्यायधीश ने एक बेतुकी याचिका पर अपना उचित फैसला दिया उसके लिए वोह बधाई के पात्र है ….. इस खबर को हमको बताने के लिए आप भी बधाई के हकदार हो गये है

baijnathpandey के द्वारा
March 2, 2011

बहुत खूब दीपक भाई ……….बेहद सारपूर्ण आलेख

manojgautam के द्वारा
March 2, 2011

दीपक जी नमस्कार सबसे पहले तो मैं आपके मेरे लेख को पढने और और समर्थन करने के लिए धन्यवाद् करता हूँ ! आपने मेरे लेख के समर्थन मैं जो यहाँ उदहारण दिया वास्तव वो उन लोगो के मुहं पर तमाचा है जो दूसरों के धर्म और उनकी आस्थाओं पर उंगली उठाते है जबकि कोई भी धर्म हमें दुसरे धर्म में कमी और उसके दुष्प्रचार की स्वतंत्रता नहीं देता ! मनोज गौतम

    दीपक पाण्डेय के द्वारा
    March 2, 2011

    गौतमजी, सर्वप्रथम मेरा लेख पढने के लिए धन्यवाद. आपके लेख से ही मुझे प्रेरणा मिली , वास्तव में कोई धर्म गलत नहीं सिखाता गलत कुछ सिरफिरे लोग होते हैं. यहाँ पर एक कुतर्क को दुसरे कुतर्क से मात दी गई है,

    rajkamal के द्वारा
    March 2, 2011

    यहाँ पर एक कुतर्क को दुसरे कुतर्क से मात दी गई है, बड़े गुरुघंटाल हो भाई क्या खूब बात कही है …… मैं तों सोच ही रहा था कुछ अलग और हटके कहने के लिए लेकिन आपकी ही इस बात ने मेरी मुश्किल आज आसान कर दी …… शुक्रिया एवम बधाई

    दीपक पाण्डेय के द्वारा
    March 2, 2011

    गुरुदेव राजकमल जी, आपका चेला हूँ. आप की बात सर माथे . पर मेरे इस तर्क में गलत क्या है. कोई भी धर्म या सिद्दांत गलत नहीं होता. गलत वो इन्सान होते हैं जो उसकी गलत व्याख्या करते हैं. चाहे वो उसके अनुआयी हो या विरोधी . यहाँ iscon वाले गलत होते हुए भी गलत नकही थे . वैसे आपकी टिप्पणी बहुत संक्षिप्त रही शायद जल्दी में थे. आपकी बात भी अधूरी रह गई ..

manojtyagi के द्वारा
March 2, 2011

please bring us much more this type of incidents actually we know little about our great dharma 4 vedas, puran, upnishad, ramayan and mahabharat and thousands of great litirature make a super path to god that is HINDU

    दीपक पाण्डेय के द्वारा
    March 2, 2011

    मनोज त्यागी जी, सही कहा आपने .मेरी कोशिश जारी है.

rajeev dubey के द्वारा
March 2, 2011

दीपक जी, एक तो आपने अपना चित्र भी इतना प्यारा लगाया है कि बस, देखते ही मन प्रसन्न हो जाता है और फिर आप इतने गूढ़ हास्य के साथ लेख भी लिखते हैं… बधाई हो…

    दीपक पाण्डेय के द्वारा
    March 2, 2011

    rajeev dube ji, aapki pratikriya paa kar man prassan ho gaya. aapko meri tasveer achhi lagi , dhanyvad.

chaatak के द्वारा
March 2, 2011

दीपक जी, मैं अभी अभी मनोज जी का लेख पढ़ रहा था उन्होंने कृष्ण की १६००० रानियों का जिक्र किया है और बड़ी अच्छी तरह सनातन धर्म पर एक स्पष्ट दृष्टिपात प्रस्तुत किया है| आपकी पोस्ट को पढ़कर और भी प्रसन्नता हुई कि आज जबकि बहुसंख्यक हिन्दुस्तानी पाश्चात्य नंगई की वकालत कर रहे हैं ऐसे में भी आप जैसे युवा अपनी संस्कृति के लिए जागरूक भी हैं और इसका अनर्गल विरोध करने वालों को माकूल जवाब देने में भी नहीं हिचक रहे हैं| शुभकामनाये एवं बधाईयाँ!

    दीपक पाण्डेय के द्वारा
    March 2, 2011

    आदरणीय चातक जी. प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद . आज एक ऐसा ही लेख पढ़ा जैसा आप जिक्र कर रहे हैं. पर सच तो सच है और उसे हम खुल कर कहेंगे.


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